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योगी सरकार की गाइड लाइन जारी, 1 जुलाई से स्कूल खोलने की तैयारी

✍️✍️अक्षय मिश्रा

लखनऊ-कोविड़ 19 के चलते देश भर में त्राहि मच गई थी जिसके चलते देश को पूर्ण तरीके से लॉक डाउन कर दिया गया था,लेकिन अब प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने प्राइमरी स्कूलों को खोलने का मन बना लिया है,लेकिन नई नियमावली के मुताबिक अभी केवल शिक्षकों व प्रधानाध्यापकों को स्कूल आना होगा इस संबंध में बेसिक शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद ने आदेश जारी कर दिया है
बेसिक शिक्षा महानिदेशक ने कहा है कि एक जुलाई से शिक्षक व प्रधानाध्यापक स्कूलों में मौजूद रहकर सभी शैक्षण‍िक कार्य की तैयारी करें. श‍िक्षकों को सबसे पहले शारदा अभियान के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित करना है. दीक्षा ऐप के जरिए शिक्षकों को अपना प्रशिक्षण भी पूरा करना है. वहीं राज्य सरकार द्वारा विकसित आधारशिला, ध्यानाकर्षण और प्रशिक्षण संग्रह का प्रशिक्षण भी प्रस्तावित है. इसका प्रशिक्षण 20 जुलाई से खण्ड शिक्षा अधिकारी 25-25 शिक्षकों का बैच बनाकर देंगे.

बता दें कि इस बीच बच्चों तक किताबें पहुंचाना और यूनिफार्म बनवाने का काम भी श‍िक्षकों को ही पूरा करना है. सरकारी प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की नाप का यूनिफार्म बनवाने और समर्थ ऐप के जरिए दिव्यांग बच्चों का नामांकन ऐप पर किया जाना है.

इसके लिए शिक्षकों को गांवों व मजरों में घूमकर ऐसे बच्चों को ऐप पर पंजीकृत करना है. इनके लिए शैक्षणिक योजना तैयार करना है. मानव संपदा पोर्टल पर उपलब्ध ब्यौरों का सत्यापन और यू डायस डाटा को भी सही करने का काम इस बीच किया जाएगा.

बेसिक शिक्षा महानिदेशक ने कहा है कि एक जुलाई से शिक्षक व प्रधानाध्यापक स्कूलों में मौजूद रहकर सभी शैक्षण‍िक कार्य की तैयारी करें. श‍िक्षकों को सबसे पहले शारदा अभियान के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित करना है. दीक्षा ऐप के जरिए शिक्षकों को अपना प्रशिक्षण भी पूरा करना है. वहीं राज्य सरकार द्वारा विकसित आधारशिला, ध्यानाकर्षण और प्रशिक्षण संग्रह का प्रशिक्षण भी प्रस्तावित है. इसका प्रशिक्षण 20 जुलाई से खण्ड शिक्षा अधिकारी 25-25 शिक्षकों का बैच बनाकर देंगे.

बता दें कि इस बीच बच्चों तक किताबें पहुंचाना और यूनिफार्म बनवाने का काम भी श‍िक्षकों को ही पूरा करना है. सरकारी प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की नाप का यूनिफार्म बनवाने और समर्थ ऐप के जरिए दिव्यांग बच्चों का नामांकन ऐप पर किया जाना है.

इसके लिए शिक्षकों को गांवों व मजरों में घूमकर ऐसे बच्चों को ऐप पर पंजीकृत करना है. इनके लिए शैक्षणिक योजना तैयार करना है. मानव संपदा पोर्टल पर उपलब्ध ब्यौरों का सत्यापन और यू डायस डाटा को भी सही करने का काम इस बीच किया जाएगा.

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