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दुनिया के कई मुल्‍कों में चल रहा टीकाकरण लेकिन डराती हैं ये रिपोर्टें, वैक्‍सीन पर लोगों का जानें है रुख

नई दिल्‍ली। कोरोना संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए टीकाकरण को लेकर दुनिया के कई मुल्‍क कोशिशें कर रहे हैं। ब्रिटेन इसे आधिकारिक रूप से विधिवत शुरू भी कर चुका है। संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), कनाडा और ब्रिटेन में फाइजर इंक और बायोएनटेक एसई द्वारा निर्मित वैक्सीन की मंजूरी दे दी गई है। वहीं रूस ने कोविड-19 वैक्सीन स्पूतनिक-5 को मंजूरी दे दी है। जानें टीकाकरण को लेकर दुनिया में क्‍या कर रही हैं सरकारें और कोविड के टीके को लेकर क्‍या है लोगों का रुख…

सबसे पहले बात करते हैं अमेरिका की। अमेरिका में फाइजर ने अपने गोदाम से कोविड के टीके की पहली खेप भेज दी है। इसके साथ ही अमेरिका में टीकाकरण अभियान की बुनियाद पड़ गई है। समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अग्रणी दवा कंपनी फाइजर के कोविड-19 टीके की अतिरिक्त खेप के लिए बातचीत की जा रही है। वहीं लोगों में टीके के प्रभाव को लेकर यकीन बरकरार रहे इसके लिए राजनेता आगे आ रहे हैं। नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और उप राष्ट्रपति माइक पेंस जल्द टीका लगवाएंगे।रूस में कोविड के टीके स्पूतनिक-वी पर लोगों की मिली जुली प्रतिक्रिया नजर आ रही है। रूस में टीकाकरण शुरू हो चुका है और पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों और शिक्षकों वैक्‍सीन लगाई जा रही है लेकिन मॉस्को में कई क्लीनिकों पर टीका लगवाने के लिए लोग आ नहीं रहे। यानी टीकाकरण के प्रति लोगों की उदासीनता नजर आ रही है। मालूम हो कि रूस ने 11 अगस्त को स्‍वदेशी कोविड वैक्‍सीन स्पूतनिक-वी को मंजूरी दी थी। समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, कई लोग इस टीके के सुरक्षित और कारगर होने को लेकर संदेह जता रहे हैं।वहीं ‘रॉयल सोसाइटी फॉर पब्लिक हेल्थ’ के एक अध्ययन में पाया गया है कि ब्लैक, एशियन एंड माइनॉरिटी एथनिक समूह समेत ब्रिटेन में भारतीय मूल के लोग टीकाकरण को लेकर आशान्वित नहीं नहीं है। समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक, लोग टीकाकरण में बढ़चढ़ कर शिरकत नहीं कर रहे हैं। इसे देखते हुए ब्रिटेन सरकार से अधिक लक्षित अभियान चलाने की अपील की गई है। मालूम हो कि ब्रिटने में फाइजर/बायोएनटेक का कोविड-19 टीका पहले ही एक हफ्ते में करीब 1,38,000 लोगों को लगाया जा चुका है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने बीएमजे (BMJ) में प्रकाशित एक अध्ययन के हवाले से बताया है कि कोरोना वैक्सीन वितरण करना काफी चुनौतीपूर्ण होगा। अनुमान के मुताबिक, इससे साल 2022 तक दुनिया के एक चौथाई लोगों को कोरोना वैक्सीन का टीका नहीं लग पाएगा। हाल ही में आई एपी की रिपोर्ट में कहा गया था कि कोविड-19 वैक्‍सीन की खरीद करने वाले देशों में ज्‍यादा विकसित देश शामिल हैं। ऐसे में गरीब और विकासशील देशों के सामने बड़ा संकट मंडरा रहा है। इनको कोरोना की वैक्‍सीन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

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