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यौन उत्पीड़न मामलों की अनदेखी की इजाजत नहीं दे सकते,सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह यौन उत्पीड़न के मामलों की अनदेखी की इजाजत नहीं दे सकता। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी मध्य प्रदेश के पूर्व जिला जज की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। उन पर एक कनिष्ठ न्यायिक अधिकारी ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे जिस पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने के आदेश दिए थे। पूर्व जज ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। बाद में पूर्व जज ने जांच में शामिल होने की छूट के साथ शीर्ष अदालत से अपनी याचिका वापस ले ली।

महाराष्ट्र के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना का मामला बंद

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस मामले को बंद कर दिया जिसमें 2018 में यवतमाल जिले में अवनी नामक नरभक्षी बाघिन को मारने वाले को पुरस्कृत करने वाले महाराष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग की गई थी। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ को जब बताया गया कि बाघिन को मारने की इजाजत शीर्ष अदालत ने ही दी थी तो पीठ ने मामले को बंद कर दिया।

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