पांच राज्यों में चुनाव कराना ज्यादा चुनौती भरे

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा कि महामारी के दौरान चुनाव आयोग ने सबसे पहले राज्यसभा की 18 सीटों पर चुनाव कराए थे। इसके बाद बिहार विधानसभा चुनावों की चुनौती आई। अब एक साथ पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कराना ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान कई कर्मचारी संक्रमण की चपेट में आए, ठीक हुए और चुनावी ड्यूटी निभाई।

पश्चिम बंगाल 

पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 294 सीटें हैं। चुनाव आयोग के अनुसार बंगाल में अजय नाईक चुनावी पर्यवेक्षक होंगे। यहां 2016 में 77,413 चुनाव केंद्र थे अब 1,01,916 चुनाव केंद्र होंगे। बंगाल में पहला चरण- 27 मार्च को होगा, दूसरा- 1 अप्रैल, तीसरा- 6 अप्रैल, चौथा- 10 अप्रैल, पांचवां चरण- 17 अप्रैल, छठा चरण- 22 अप्रैल, सातवां चरण- 26 अप्रैल, आठवें चरण का मतदान- 29 अप्रैल को होगा।

असम

असम में विधानसभा की 126 सीटें हैं। चुनाव आयोग के अनुसार असम में 2016 विधानसभा चुनाव में 24,890 चुनाव केंद्र थे, 2021 में चुनाव केंद्रों की संख्या 33,530 होगी। असम में प्रथम चरण का मतदान 27 मार्च, दूसरे चरण का मतदान 1 अप्रैल और तीसरे चरण का मतदान 6 अप्रैल को होगा।

केरल

केरल में 140 विधानसभा सीटें हैं। चुनाव आयोग के अनुसार केरल में पहले 21,498 चुनाव केंद्र थे, अब यहां चुनाव केंद्रों की संख्या 40,771 होगी। यहां एक चरण में  6 अप्रैल को मतदान होगा।

तमिलनाडु 

तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटें हैं। चुनाव आयोग के अनुसार तमिलनाडु में 2016 विधानसभा चुनाव में 66,007 चुनाव केंद्र थे, 2021 में चुनाव केंद्रों की संख्या 88,936 होगी। यहा भी एक चरण में  6 अप्रैल को मतदान होगा।

पुडुचेरी 

पुडुचेरी में 30 विधानसभा सीटें हैं। चुनाव आयोग के अनुसार यहां एक चरण में 6 अप्रैल को मतदान होगा।  फिलहाल यहां राष्ट्रपति शासन लागू है। पिछले दिनों कांग्रेस-डीएमके गठबंधन वाली सरकार गिर गई थी। वी नारायणसामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने सोमवार को विश्वास मत से पहले इस्तीफा दे दिया था। पार्टी के कई विधायकों के इस्तीफा देने के बाद सरकार अल्पमत में आ गई थी।  पिछले चुनाव में कांग्रेस को 21 में से 15 सीटें मिली थीं। बहुमत के लिए 16 सीटों की जरूरत।