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अध्यात्म हमारे जीवन की अपरिहार्य आवश्यकता है। इसके द्वारा हमारे जीवन का संपूर्ण विकास होता है: महाराज जी
Go Back | Ashok Shrivastava , Nov 23, 2017 05:35 PM
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News Image Varanasi / Banaras : 


 चौबेपुर (वाराणसी ) अध्यात्म हमारे जीवन की अपरिहार्य आवश्यकता है। इसके द्वारा हमारे जीवन का संपूर्ण विकास होता है। हम इस शरीर में हैं, हम इस संसार में है, जिंदगी बीत रही है हमारी, और जिंदगी जीने में ही सारी जिंदगी बीत जाती है और जिंदगी है क्या, जीवन क्यों मिला है, इसका कितना, कहाँ, किस हद तक हमें बोध हो पाता है। उपरोक्त बातें विहंगम योग के संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने स्वर्वेद महामंदिर धाम उमरहां में आयोजित विहंगम योग संत समाज के 94 वें वार्षिकोत्सव एवं 5101 कुण्डीय विश्व शांति वैदिक महायज्ञ के प्रथम दिवस  पर उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। महाराज जी ने भक्तों को बताया कि हमारा यह मानव जीवन अनमोल है, ईश्वर का महान प्रसाद है, यूँ ही नहीं मिला है और हम यूँ ही नहीं गँवा सकते। हमारे भीतर अनन्त की शक्ति है, ईश्वर ही हमारे भीतर बैठे हैं, हमारे अंदर ज्ञान का अनंत प्रकाश है। आवश्यकता है सद्गुरु युक्ति की , जिसके द्वारा हमारा जीवन निखर जाए, संवर जाए, इसीलिए सत्संग है और इसीलिए अध्यात्म की आवश्यकता है। उन्होंने कहा  कि भारत आध्यात्मिक देश रहा है, अध्यात्म से ही हमारी पहचान संपूर्ण विश्व में है, इसी आध्यात्मिक ज्ञान की धारा को विहंगम योग के प्रणेता अनन्त श्री सदगुरू सदाफल देव जी भगवान ने अपनी आत्मा में धारण किया और संपूर्ण विश्व की मानवता के कल्याण के लिए उसे स्वर्वेद में अभिव्यक्त कर दिया। आध्यात्मिक जीवन ही श्रेष्ठ जीवन है। विहंगम योग विशुद्ध आध्यात्मिक मार्ग है। विहंगम योग से हम संसार के समस्त कर्तव्यों का पालन करते हुए सांसारिक कष्टों से ऊपर उठ जाते हैं। जीवन में स्वास्थ्य सुख और शान्ति की त्रिवेणी को प्राप्त कर लेते हैं।  संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज की दिव्यवाणी स्वर्वेद कथामृत के रूप में लगभग तीन घंटे तक प्रवाहित होती रही। स्वर्वेद के दोहों की संगीतमय प्रस्तुति से सभी स्रोता मंत्र मुग्ध हो उठे। संत श्री ने ओजस्वी वाणी में ब्रह्मविद्या विहंगम योग के सैद्धांतिक पक्ष को प्रकाशित करते हुए स्वर्वेद की अजस्र ज्ञान गंगा को प्रवाहित कर दिया। इसके पूर्व प्रात: 8 बजे भव्य विहंगम योग समारोह का विधिवत उद्घाटन सद्गुरु स्वतंत्र देव जी महाराज एवं संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज के सान्निध्य में 'अ ' अंकित श्वेत ध्वजारोहण से हुआ। इसके बाद सदगुरुदेव द्वारा रचित स्वागत गान एवं विश्व की मंगलकामना से ओतप्रोत मंगल गान तथा स्वामी जी द्वारा रचित उद्घोषणा की प्रस्तुति हुई।  इसके बाद संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने  उद्घाटन सत्र को संबोधित किया ।   तत्पश्चात शारीरिक आरोग्यता के निमित्त उपस्थित योग साधकों को नि:शुल्क आसन प्राणायाम का प्रशिक्षण अश्रम के कुशल योग प्रशिक्षकों  द्वारा दिया गया। मानव मन की शांति व आध्यात्मिक उत्थान के निमित्त ब्रह्मविद्या विहंगम योग के क्रियात्मक ज्ञान की दीक्षा प्रतिदिन प्रात: 10 बजे से सायं 6 बजे तक आगत नए जिज्ञासुओं को दिया जा रहा है। इस आयोजन में प्रतिदिन नि:शुल्क योग, आयुर्वेद, पंचगव्य, होम्योपैथ आदि चिकित्सा पद्धतियों द्वारा कुशल चिकित्सकों के निर्देशन में रोगियों को चिकित्सा परामर्श भी दिया जा रहा है। सायंकाल के सत्र में , संस्थान द्वारा चलाये जा रहे समाज सेवा कार्यों में जिन सेवकों की  भूमिका सराहनीय रही है उन्हें मंच से सम्मान कर मैडल भी दिया गया। प्रति वर्ष की तरह 28 अक्टूबर को संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज के जन्मोत्सव पर विश्वव्यापी रक्त दान का कार्यक्रम रक्तसेवा- मानव सेवा के साथ आयोजन किया गया था। जिन सेवको ने रक्त का दान किया उन्हें भी मंच से सम्मान कर प्रशस्ति पत्र के साथ मेडल दिया गया। विहंगम योग का प्रधान सद्ग्रन्थ स्वर्वेद जो दोहा रूप में है जिसके अंदर 5000 साधना परक आध्यात्मिक दोहे हैं। इसी दोहे को लेकर स्वर्वेद अंतराक्षरी का भी कार्यक्रम हुआ।  ऋषि और कृषि का देश है भारत। इसी इसी परंपरा को आगे  बढाने के लिए स्वर्वेद महामंदिर के प्रांगण में  गो - सेवाग्राम  प्रदर्शनी भी लगाया गया है जिसको देखने के लिए श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा हुआ है। आज 24 नवंबर शुक्रवार को दिन में 11 बजे से 5101 कुण्डीय विश्व शांति वैदिक महायज्ञ का शुभारंभ सद्गुरु आचार्य श्री स्वतंत्र देव जी महाराज एवं संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज के सांनिध्य ने होगा। जिसके लिए 4 लाख वर्गफुट में 5101 कुंड सजकर तैयार हो चुका है। विशालकाय महायज्ञ परिसर को गोबर से लीपकर बंगाल से आये विशेष कलाकारों द्वारा सजाया गया है। जिसमे 21000 यजमान एकसाथ बैठकर समष्टिगत एवं व्यष्टिगत उत्थान के लिए मंत्रोंचारण के बीच यज्ञ वेदी में आहुति को प्रदान करेंगे। इस अवसर पर झारखण्ड राज्य के गो पशुपालन एवं कृषि मंत्री रणधीर सिंह, ओ पी एन सिह पूर्व कमिश्नर,   उद्योगपति सरदार अमित पाल दिल्ली, प्रेम पाल दिल्ली,  बजरंग बजारी मुम्बई, सतीश भाई गुजरात, जनार्दन पण्डे पुणे, गजेंद्र जी आदि गणमान्य अतिथि उपस्थित होकर महाराज श्री का आशीर्वाद प्राप्त किये।

 
(Ashok Shrivastava)  
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