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गुलाम नबी आजाद जब जब यूपी के प्रभारी बन के आए कांग्रेस का सत्यानाश हुआ- डॉ निर्मल खत्री

  • डॉ०निर्मल खत्री कहा- “जब मौका दिया गया तो मैं भी अपनी बात कह दूं”

(सीवीएम न्यूज़ प्रतिनिधि डॉ अंशुमान सिंह गुडडू)

अयोध्या। गुलाम नबी आजाद के ANI पर इंटरव्यू सुनकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष/पूर्व सांसद डॉ. निर्मल खत्री ने 11 बिंदुओं पर अपनी प्रक्रिया दी जो निम्नवत् है
1.पहली बात C.W.C के प्रस्ताव के बाद कि कोई भी कांग्रेस पार्टी का नेता कांग्रेस पार्टी के अन्दुरुनी मसलों के सम्बंध में अपनी राय भविष्य में सार्वजनिक रूप से व्यक्त नही करेगा।आजाद जी का यह इंटरव्यू उचित नही,बल्कि प्रस्ताव की भावना का उल्लंघन है।
2.उन्होंने मौका दे ही दिया है तो मैं भी अपनी बात रख ही देता हूँ।
अपने लम्बे चौड़े Bio Data का उल्लेख उन्होंने किया जिससे मुझे यह पता चला कि कांग्रेस पार्टी की राजनीति में मैं उनसे सीनियर हूँ।वर्ष 1970 में मैं शहर कांग्रेस कमेटी फैजाबाद के वार्ड हैदरगंज का अध्यक्ष बनाया गया व जिला युवक कांग्रेस का महासचिव भी।शहर युवक कांग्रेस फैजाबाद का अध्यक्ष वर्ष 1972 में बनाया गया था। उस समय कांग्रेस पार्टी में ये क्या कर रहे थे ?
3.वर्ष 1977 में आजाद जम्मू कश्मीर में विधानसभा का पहला चुनाव लड़े मात्र 320 वोट मिला। और मुझे भी 1977 में अयोध्या विधानसभा क्षेत्र (उ.प्र) से विधानसभा का प्रथम चुनाव लड़ने का मौका मिला और मैं 428 वोट से हारा।
4.अपने इंटरव्यू में इन्होंने संजय गांधी जी के साथ काम करने का जिक्र किया।मुझे भी इस बात का फक्र है कि मैं उस समय संजय गांधी जी के संघर्ष के दिनों में उनके साथ रहा और मुझे याद है कि उनके ऊपर चलने वाले एक देहरादून के एक मुकदमे में पहुँच कर मैं उनके साथ 21 मई 1977 में गिरफ्तार हुआ और 21 मई  से 25 मई तक बरेली सेंट्रल जेल में पुनः 25 की सायं से लेकर 26 मई तक देहरादून जेल में बंद रहा व 26 मई को देहरादून जेल से रिहाई हुई।मुझे याद है कि इस दौर में कांग्रेस के नेता कमलनाथ जी बरेली जेल में उनसे मिलने भी आये थे। मुझे याद है कि 1977 और 1980 के मध्य जब इन्दिरा जी पर तमाम झूठे मुकदमे चल रहे थे उस समय की संघर्ष यात्रा में 4 अक्टूबर 1977 को इन्दिरा जी की गिरफ्तारी के विरोध में मैने फैजाबाद में साथियों के साथ गिरफ्तारी दी व 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक जेल में बन्द रहा।
पुनः 19 दिसंबर 1978 को इन्दिरा जी की गिरफ्तारी व लोकसभा की सदस्यता समाप्त किये जाने के विरोध मे मैं फैजाबाद में गिरफ्तार हुआ और 22 दिसबंर तक जेल में बन्द रहा।
वर्ष 1977 व 1980 के मध्य के प्रारंभिक वर्षो में इन्दिरा जी और संजय जी के साथ आप सक्रिय भूमिका में नही दिखे लेकिन जब आपको लगा कि कांग्रेस पुनः लौट सकती है तब वर्ष 1979 में दिल्ली में हुए एक प्रदर्शन में गिरफ्तार होकर तिहाड़ जेल में बंद हुए।जबकि 1977 से ही देश में लाखो कांग्रेसी इन्दिरा जी के ऊपर होने वाले जुल्म के विरोध में जेल भरो आंदोलन कर रहे थे।
आजाद जी आपके संघर्ष की तुलना में लाखों कांग्रेसियों ने इस दौर में नेहरू-गांधी परिवार के साथ संघर्ष किया।
5.अपने इंटरव्यू में इन्होंने कुछ राज्यों का जिक्र किया जिसमें यह दावा किया कि इन्ही के दम पर उन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनी।लेकिन आप अपने इंटरव्यू में उत्तर प्रदेश को भूल गये जहाँ पर जब-जब आप प्रभारी बन कर आये कांग्रेस का सत्यानाश किया।
वर्ष 1996 में इन्होंने उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में B.SP से समझौता किया,नतीजा कोई खास नही। यात्रा का कार्यक्रम U.P में भी इन्होंने चलाया था,लेकिन सफलता का करिश्मा न कर सके। वर्ष 2017 में इन्होंने SP से समझौता किया सीट पहले से निम्नतम स्तर पर 7 सीट आ गयी। यानी यह जब जब उ.प्र. के प्रभारी के रूप में आये उत्तर प्रदेश में कांग्रेस बैक गेयर में ही जाती रही।
6.संघठन के चुनाव की दुहाई देने वाले आजाद साहब का हाल जो मैने पिछले संगठनात्मक चुनाव के समय देखा वह यह कि A.I.CC का महाधिवेशन (जो कि वर्ष 2018 इंदिरा गांधी Indoor Stadium New Delhi) में हुआ उस के एक दिन पहले तक यह उत्तर प्रदेश के प्रभारी के रूप में A.I.CC और PCC सदस्यों की List जारी कर रहे थे।यह भी देखने की कोशिश इन्होंने नही की कि जिनको यह A.I.CC या PCC सदस्य बना रहे है वह कांग्रेस के सदस्य बने भी है या नही।
7.आपने इंटरव्यू में यह कहा कि मेरे काम ,योगदान को आजकल के बच्चे क्या जाने। ‘बच्चे’ का तात्पर्य सब समझते है। वह ‘बच्चे’ आपकी असलियत जानने के बाद भी आपको सरमाथे पर बैठाये रहे यही उनका व उनके परिवार का बड़प्पन था और मैं यह भी कहना चाहूँगा कि वह बच्चे आपसे ज्यादा हुनरमन्द व होशियार है।यहाँ मैं यह भी कहना चाहूँगा की आप का राजनीति में राष्ट्रीय स्तर पर अभ्युदय एक कम उम्र के नेता,इसी परिवार के नेता संजय गांधी की ही बदौलत हुआ था जिन लोगो को आप ‘बच्चे’ बता रहे है।
देश की राजनीति में इतिहास जब लिखा जायेगा तब आप का कही जिक्र भी नही होगा लेकिन उनका होगा।यह आप जितनी जल्दी समझ सके वह अच्छा होगा। क्योकि वह लोग कांग्रेस के लिए कांग्रेसी है और आप अपने लिए कांग्रेसी।यहाँ एक उदाहरण देना चाहूँगा कि सनातन धर्म मे दो अवतार राम व कृष्ण की कथा हम सबने सुनी है। राम के प्रिय हनुमान व कृष्ण के प्रिय अर्जुन। क्या कारण है कि राम के भक्त हनुमान का मंदिर तो जगह जगह है लेकिन कृष्ण के भक्त अर्जुन का मंदिर नही है।क्योंकि हनुमान राम के लिए लड़े व अर्जुन अपने लिये लड़े।
यहाँ हर कांग्रेसी हनुमान है सोनिया जी – राहुल जी के लिए ,उनके लिए लड़ता है और आप अपनी तरक्की के लिए ही लगे रहे।यही सत्य है जो नकारा नही जा सकता।
8.आजाद जी ने अपने इंटरव्यू में यह कहा कि 23 साल से कांग्रेस कार्य समिति का चुनाव नही हुआ। सवाल उठता है कि इन 23 वर्षों जब आप भी उस मनोनीत C.W.C के सदस्य थे तब अपने यह सवाल क्यो नही उठाया,आपकी अंतरात्मा की आवाज इस समय ही क्यो उठी। मेरी भी राय में हर स्तर पर चुनाव होना चाहिए लेकिन आप जैसे नेताओं ने ही मनोनयन के रास्ते को बेहतर समझा व उसका आनन्द लिया।ज्ञातव्य हो कि माननीय राहुल गांधी जी की ही सोच रही है कि मूल संगठन व फ्रन्टल संगठनो मे हर स्तर पर चुनाव हो और उन्होंने  Youth Congress व NSUI में संघठनात्मक चुनाव कराकर दिखा भी दिया कि उनकी सोच क्या है।
9.इन्होंने यह भी कहा कि अगर राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनना है तो हमारी बात सुननी होगी।
यह तो उल्टा सवाल आजाद साहब कर रहे है जबकि उ.प्र. में वर्ष 2017 के विधानसभा के चुनाव के समय का हाल मैं जानता हूँ जब आजाद साहब उ.प्र. के प्रभारी थे। उ.प्र. के सभी कार्यकर्ता समझौते के खिलाफ थे ,और जहाँ तक मेरी जानकारी है माननीय राहुल गांधी जी भी समझौते के खिलाफ थे लेकिन संभवतः आप जैसे वरिष्ठ नेता और प्रभारी की जिद्द के चलते वो चुप रह गये और आपकी समझौता परस्त राजनीति की सोच के चलते ही SP से गठबंधन हुआ और कांग्रेस का बुरा हाल हुआ। इन्होंने राजनीतिशास्त्र का जो सिद्धान्त समझा उसमे समझौते की राजनीति ही मुख्य केंद्र बिन्दु में रही। इनकी सोच में देश नही जम्मू व कश्मीर की राजनीति रही और आजाद साहब यह जानते थे वहाँ  बिना समझौते के इनका न अस्तित्व रहेगा न ही यह वहाँ कुछ मिल पायेगा।
10.आजाद साहब ने यह भी कहा कि लेटर लीक होने से कौन सी देश की अखंडता पर खतरा आ गया।मेरा इस पर यह कहना है कि देश की अखंडता पर खतरा तो नही लेकिन कांग्रेस की अखंडता पर खतरा जरूर हुआ। और यदि कांग्रेस की अखंडता खतरे में पड़ी तो यकीनन यह देश की अखंडता को भी प्रभावित करेगी।चूकि एकजुट कांग्रेस ही देश की अखंडता की गारंटी है।
11.उन्हें यह नही भूलना चाहिए कि वह गांधी परिवार के दम पर ही C.W.C मे सदस्य बनते रहे और जिन C.W.C के 2 चुनाव में निर्वाचित होने का दावा इन्होंने किया वह गांधी परिवार की सहानभूति के कारण ही इनको नसीब हुआ। ईश्वर से यह प्रार्थना है कि  इनको जमीनी वास्तविकता का ज्ञान हो  और गांधी परिवार पर अप्रत्यक्ष वार करने की नीयत इनकी समाप्त हो।
हमे यह समझ मे आ रहा है कि कांग्रेस पार्टी पर एक क्षेत्रीय दल के नेता जो पहले कांग्रेस में भी रह चुके है,अपना एकाधिकार चाहते है और कुछ लोग उनके हाथों में खेल रहे है।आइये हम सब निष्ठावान कांग्रेसजन कांग्रेस पार्टी को बचाने के लिए सोनिया गांधी जी – राहुल गांधी जी – प्रियंका गांधी जी के हाथों को मजबूत बनाये।

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