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क्राइम चिकित्सा रायबरेली

डीएम की पड़ताल में खुली सीएमओ की हेराफेरी, कार्यवाही से बचने को सीएमओ ने डाली गंदी बात की गुगली

✍️✍️ अक्षय मिश्रा
रायबरेली -“आईने से डर गए तुम या अपनी हकीकत छुपाते हो,दोगली सीरत से कैसे सूरत मिलाते हो,बेईमानी में तुमने निकाल दी है जिंदगी,इतने फरेब में कैसे सुकून पाते हो।”उपरोक्त पंक्तियां सीएमओ रायबरेली की शख्सियत को बयान करने के लिए काफी हैं।रायबरेली में मजबूती से अब तक जमकर कागजी खेल के जरिये सरकारी धन को अपने शातिर तिकड़मी दिमाग से मनमाफिक ठिकाने लगते रहने वाले सीएमओ संजय कुमार शर्मा अब अपने ही खेल में फंसते जा रहे हैं।रायबरेली ज्वाइन करते ही तेज-तर्रार जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने सीएमओ से बैठक में उनसे योजनाओं पर किये गए कार्यों के बाबत सवाल पूछे।पर जिले में अब तक तैनाती के दौरान मछली की आँख की तरह सिर्फ धन पर निगाहें लगाए सीएमओ अपने विभाग की योजनाओं, क्रियाकलापों का ब्यौरा देने में ठन-ठन निकले।गौरतलब है नए जिलाधिकारी के ज्वाइन होने से पहले तक जिले में सीएमओ की तूती बोलती रही।सीएमओ सरकारी योजनाओं के खर्च के लिए आये बजट का बंदरबांट करते रहे और विभागीय ट्रांसफर/पोस्टिंग के जरिये मोटी धन उगाही करते रहे।तमाम खरीदों में सीएमओ द्वारा भारी कमीशन लिए जाने की चर्चाएं काफी गर्म रहीं और उन पर विवादों के शोर भी उठे।पर मैनेजमेंट में माहिर सीएमओ सभी विवादों और हेराफेरी की करतूतों पर अपने उच्च वरदहस्तों की बदौलत पर्दा डालने में कामयाब रहे।
पर इस बार दाँव उल्टा पड़ गया।
रायबरेली आते ही पीलीभीत में अपने रेन वाटर हार्वेस्टिंग के अतुलनीय प्रयासों के लिए जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव को भारत सरकार द्वारा सम्मानित किए जाने की सूचना प्राप्त हुई। इसके बाद सीएमओ रायबरेली की भ्रष्टाचार की कलई खोल देने पर
मानो रायबरेली की जनता को यह संदेश मिल गया हो कि जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव को भारत सरकार क्यों उनकी काबिलियत के लिए सम्मानित कर रही है।
अपनी पोल खुलते देख चालबाज सीएमओ ने कार्यवाही से बचने और मामले को विवादों में उलझाने के लिए जिलाधिकारी पर इमोशनल गुगली फेंकी। सीएमओ द्वारा आरोप लगाया गया कि जिलाधिकारी ने उन्हें बैठक में गधा कहा और खाल खिंचवाकर, गाड़ने की धमकी दी। घटना को लेकर बड़ा हो हल्ला मचाया गया।मीडिया संस्थानों ने भी इसे काफी गरमाया। सीएमओ ने पीएमएस संघ को अपनी ओर से बैटिंग के लिए उतारकर प्रदेश के आला स्वास्थ्य महकमे को पत्र लिख डाला।पर सीएमओ को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब पीएमएस संघ के अध्यक्ष डॉ सैयद अल्ताफ ने उनकी तरफदारी करने से मना कर दिया भन्नाई सीएमओ की टीम ने डॉ अल्ताफ को तत्काल पद से हटाकर दूसरे डाक्टर को अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। अब यह जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव को तीन दिन के अंदर हटाने की मांग कर रहे हैं।
इधर जिले की आम जनता सीएमओ की भ्रष्टाचार की कलई खुलने से काफी खुश है।इससे पहले भी सीएमओ की कार्यशैली के विरोध में कई शिकायतें की जा चुकी हैं पर वह सभी सीएमओ के कमाऊ पूत होने की वजह से नक्कारखाने में तूती की माफिक दब गईं।
सीएमओ और पीएमएस संघ द्वारा चोरी और सीनाजोरी की इस घटना से जिले की जनता में खासा रोष व उबाल है। भ्रष्टाचार की परतें नोच लेने वाले जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव के साथ जिले की जनता ने खड़े होने का ऐलान कर दिया है। जिले के भारतीय किसान यूनियन(भानु), मजदूर किसान सेवा समिति, युवा विकास समिति, भ्रष्टाचार व अन्याय के खिलाफ लड़ रही “टीम18” , अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन, आर्ट ऑफ ओम व संस्कार भारती समेत तमाम सामाजिक संगठनों ने ऐलान किया है कि वह जिले के लिए नायक बनकर आये जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव के साथ है, जरूरत पड़ने पर वे सभी बेईमानों के खिलाफ कोविड19 के नियमानुसार आंदोलन और प्रदर्शन भी करेंगे।
जब चोर पकड़ा जाता है तो बहुत सारे हथकंडे अपनाता है उसी का परिचय दे रहे हैं सीएमओ।सीएमओ जानते हैं कि अगर करोड़ों के घोटालों की जांच होगी तो वसूली भी होगी और जेल भी जाना होगा।
सभी संगठनों ने दो कार्यक्रमों के ब्यौरे लिए जाने की मांग करते हुए कहा है कि जिले में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य मेला सभी विधानसभाओं में किया गया था। जिसमें करोड़ों रुपए के घोटाले हुए हैं। दिखाया गया है कि कई लाख रुपए की दवाइयां बांटी गई हैं कई लाख रुपए टेंट कुर्सी में खर्च हुए हैं कई लाख रुपए भोजन में खर्च हुए हैं।
दूसरा कार्यक्रम रायबरेली शहर में संसदीय स्वास्थ्य मेला हुआ था अगर इसकी जांच कर दी जाए तो सीएमओ के साथ-साथ कुछ सफेदपोश भी बेनकाब हो जाएंगे।
2 दिन का टेंट का खर्च 10 लाख से ऊपर का दिखाया गया है। 25 – 30 डॉक्टर और नर्स के खाने का खर्च कई लाख रुपए दिखाया गया है कई लाख रुपए की दवाइयां बांटी गई है कई लाख रुपए प्रचार-प्रसार में खर्च दिखाया गया है लेकिन कहीं प्रचार प्रसार पूरे शहर में हुआ ही नहीं।कई लाख रुपए बैनर पोस्टर में दिखाए गए हैं सबकी कीमत करोड़ों में होती है।संसदीय स्वास्थ्य मेला का हाल यह था कि शायद 2 दिन में पूरे सौ मरीज भी नहीं आए थे और कई लाख रुपए की दवाइयां सारी पैथी की बांटी गई हैं।
संगठनों ने माननीय मुख्यमंत्री जी से मांग करते हुए कहा है कि गरीबों का खून चूसने वाले ऐसे सीएमओ और उनके साथ जो भी घोटाले में शामिल लोग हैं उन सभी को तत्काल प्रभाव से सलाखों के पीछे भेज देना चाहिए।
फ़िलहाल इस विवाद में जिले की जनता, बुद्धिजीवियों, और सामाजिक संगठनों के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव के पक्ष में खुलकर आ जाने से सीएमओ व उनकी चांडाल चौकड़ी के सारे षडयंत्र ध्वस्त होते नजर आ रहे हैं।

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