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राजस्थान सरकार का अधिकारियों को फरमान, सांसद-विधायकों को खड़े होकर दें सम्मान

राजस्थान सरकार ने अपने अधिकारियों को फरमान दिया है कि वे उनके कार्यालयों में दौरे पर आने वाले विधायकों और सांसदों का खड़े होकर सम्मान दें। इस बारे में मुख्य सचिव राजीव स्वरूप ने सभी विभागों को एक विस्तृत सर्कुलर जारी करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि न सिर्फ विधायकों और सांसदों के आने पर खड़े हो जाएं बल्कि जब वे जा रहे हों तब भी परिसरों में खड़े हो जाएं।इसके साथ ही, विधायकों और सांसदों की तरफ से भेजे जा रहे पत्रों के बारे में भी सीनियर अधिकारियों ने अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की है।

सांसदों और विधायकों की तरफ से किसी मामले को उठाए जाने पर अधिकारियों को 30 दिनों के भीतर लिखित जवाब देकर उसका निपटारा करना होगा। अगर उन्हें फोन पर मैसेज भेजा गया हो तो भी उन्हें गंभीरतापूर्वक लेना होगा।23 सितंबर को जारी एक आदेश में मुख्य सचिव ने कहा कि जब भी किसी सांसद और विधायकों की तरफ से किसी भी विभाग में जनता के कल्याण के लिए पत्र लिखा जाता है तो संबंधित विभाग को पत्र की स्वीकृति भेजनी चाहिए और अगर उनकी तरफ से उठाया गया अगर कोई मुद्दा लंबित रहता है तो समय समय पर विभाग की तरफ से उसके बारे में बताया जाना चाहिए।सर्कुलर में चीफ सेक्रेटरी ने इस बात का भी जिक्र किया है कि इससे पहले जारी निर्देशों में कि विधायकों और सांसदों के पत्रों का जवाब दिया जाए, उसका ठीक तरीके से पालन नहीं किया जा रहा था।

सर्कुलर में यह कहा गया है कि उनके साथ सम्मान और आदर के साथ बर्ताव किया जाएगा। इसमें कहा गया कि जब भी सांसद या विधायक मिलने के लिए आएं वे आने और जाने के समय खड़े होकर सम्मान देना चाहिए और उनकी तरफ से दिए गए सुझावों और शिकायतों पर भी उचित कार्रवाई करना चाहिए।स्वरूप ने कहा कि राजस्थान सरकार की पहली प्राथमिकता सुशासन देना है और सांसद विधायको की तरफ से लिखे गए खतों को लेकर गंभीर हैं, इसलिए नया सर्कुलर जारी किया गया है।

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