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Lucknow

तहसील मोहनलालगंज भ्रस्टाचारियों का बोल बाला, प्राइवेट लड़के रख कराते हैं अवैध धन उगाही

 

लखनऊ।उत्तर प्रदेश सरकार कहती हैं कि भैय्या अच्छे दिन जरूर आएंगे लेकिन आएंगे कब जब रोज़ाना कमा कर अपना व अपने परिवार का पेट भरने वाले परिवार मरने पर मजबूर हो जाएंगे या फिर तब जब कुर्सी खिसकने का समय क़रीब आ जाएगा चुनाव का इंतजार कर रहे हैं, तो यह बात अच्छे से समझ लीजिए कि अच्छे दिन आये या न आये लेकिन अच्छे लोग है जो कि यू पी में अच्छी सरकार लाकर रहेंगे। सूबे के मुखिया हिसाब करेगी जनता आपसे साहब कुर्सी सम्भाल कर रखियेगा साहब, कही खिसक न जाएं बात सही है कड़वी जरूर लगेगी लेकिन सूबे के मुखिया के काबू में भले ही अधिकारी हो लेकिन अधिकारियों के काबू में लेखपाल, कर्मचारी, बाबू नहीं है इसका कारण यह भी है कि कही न कही अंदर ही अंदर से लेन-देन की प्रथा जो कि भ्रस्टाचारियों द्वारा शुरू की गई आज भी लगातार बरकरार है। भ्रष्टाचार का नशा अधिकारियों को भी काफ़ी हद से ज्यादा ही लग चुका है, ऐसे भ्रस्टाचारियों पर सरकार द्वारा कड़ी कार्यवाही चाहती हैं जनता आज जो हालात बन चुके हैं सभी सरकारी दफ्तरों के चाहे वह थाना हो तहसील हो या ब्लॉक हो या बिजली विभाग ही हो सभी सरकारी दफ्तरों में काम करवाने के लिए छोटे कर्मचारी व लेखपालों व बाबुओं की लूट घसोट से लेकर अधिकारियों तक छीना झपटी रोजाना मची हुई रहती हैं, राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज की तहसील जिसमें अगर मुख्यमंत्री भी एक आम जनता की तरह आकर अपनी पहचान छुपा कर काम करवाने आएंगे तो यह सब उनसे भी रुपयों की डिमांड कर देंगे ऐसे भ्रस्टाचारियों को कैसे दण्डित करेंगे साहब देश की सरहद पर तैनात फ़ौजी दुश्मनों से देश को सुरक्षित रखते हैं। लेकिन देश में रह कर देश को लूटने के लिए ऐसे सरकारी लोगों को क्या सजा सुनायेंगे कैसे भ्रस्टाचारियों से तहसील, थानों एवं ब्लाकों सहित ग्रामों को आज़ाद कराएंगे कुछ सिस्टम ठीक करिये साहब नही एक वोट सरकार बदल देती है जनता परेशान हैं बहुत भ्रस्ट अधिकारियों कर्मचारियों बाबुओं लेखपालों से। प्राइवेट लड़कों को अपने पास सरकारी दफ्तरों में रखें हुए है जिनके द्वारा अवैध रूप से सरकारी दफ्तरों में काम करवाने आये लोगों से धन उगाही का सिलसिला लगातार जारी है जो कि बहुत गलत है। सरकार उनको पर्याप्त तनख़्वाह देती हैं जिससे वह अच्छा जीवन गुजार सकते हैं इसके बावजूद भ्रस्टाचारियों को अपना ईमान बेच ग़रीब मजदूरों की हाय लेने में ही एक अलग मजा आता है, अरे मूरख भ्रस्टाचारी इंसान क्या लेकर आये थे क्या लेकर जाओगे देश में रहने वाले भ्रस्टाचारियों ज़रा सा सोचों की सरकारी दफ्तरों में काम करवाने आये हुए लोगों से रुपयों क्यों माँगते हो कैसे लाएंगे रुपये पैसे यह सोचा है कभी मेहनत करते हैं पसीना बहाते है तब जाकर दो सौ तीन सौ रुपये कमा पाते हैं। सरकारी नुमाइंदे होकर अच्छी तनख़्वाह उठाते हुए भी रुपयों की चाहत रखते हो गलत बात है किस बात के रुपये पैसे चाहिए। सरकार तमाशाबीन बनी हुई है सुन रही हैं देख रही है सब कुछ लेकिन ऐसे भ्रस्टाचारियों पर लगाम कसने में नाकाम हैं शायद अपाहिज है या फिर शायद इनका भी हिस्सा लगता है भोली भाली जनता के मुंह से सुना है कई बार ऊपर तक माल-पानी जाता है सब मिल जुल कर खाते हैं लेकिन इस बात से आज कोई भी अंजान नहीं है, तहसील थाना ब्लॉक बिजली विभाग सभी सरकारी दफ्तरों में भ्रस्टाचार कूट कूट कर भरा हुआ है।यह सिलसिला ख़त्म कब कैसे होगा साहब ध्यान दीजिए नही तो इसके जिम्मेदार खुद होंगे आप सूबे के मुखिया है कुर्सी हिलती हुई नज़र आ रही है।

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