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नवरात्र 2020 : नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री का पूजन

वाराणसी। नवरात्र में पहले दिन शैलपुत्री देवी के रूप में मां की पूजा का विधान है। वाराणसी में सभी नौ देवियों के मंदिर विभिन्‍न स्‍थानों पर प्राचीन काल से ही स्‍थापित हैं। शैलपुत्री देवी का मंदिर अलईपुरा रेलवे स्टेशन के पीछे शक्कर तालाब के पास बना हुआ है।शारदीय नवरात्र आज 17 अक्टूबर, शनिवार से शुरू हो चुका है। पहले दिन भगवती के शैलपुत्री स्वरूप का दर्शन पूजन भक्त कर रहे हैं। देवी के मंदिर वाराणसी के अलईपुरा क्षेत्र में है जहां सुबह से ही आस्‍थावान शैलपुत्री देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में प्रथम पूज्‍य के दर्शन पूजन के लिए पहुंचे। हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण देवी का नाम शैलपुत्री पड़ा है। एक कथा के अनुसार दक्ष प्रजापति ने यज्ञ का एक बार आयोजन किया था उसमें समस्त देवताओं को आमंत्रित किया किंतु भगवान शिव को नहीं बुलाया। भगवान शिव ने बिना निमंत्रण में जाने से मना कर दिया लेकिन, पत्‍नी के आग्रह पर जाने की अनुमति दे दी। हालांकि आयोजन में भगवान शिव का अपमान होने से दुखी होकर उन्‍होंने स्वयं को यज्ञ में भस्‍म कर लिया। मान्‍यता है कि अगले जन्‍म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्‍म हुआ, इसी कारण उनको शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है।मिलता है पुण्‍य फल : ज्‍योतिषाचार्य पं.ऋषि द्विवेदी के अनुसार शक्ति की अधिष्ठात्री मां दुर्गा की पूजा आराधना के पर्व शारदीय नवरात्र का आरंभ आश्विन शुक्ल प्रतिपदा यानी आज शनिवार से हो रहा है। प्रथम दिन देवी शैलपुत्री के दर्शन पूजन का विधान है। मान्यता है कि शांति और उत्साह प्रदान करने वाली देवी भय का नाश करती हैं। यह यश-कीर्ति-धन-विद्या के साथ ही मोक्ष देने वाली हैं। यही आकांक्षा भक्तों के मन में होनी चाहिए।

मंत्र का जाप : प्रथम दिन कलश स्‍थापन के बाद देवी शैलपुत्री का पूजन करने की मान्‍यता है। देवी शैलपुत्री के पूजन के दौरान – ‘वंदे वांछितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम। वृषारुढां शैलपुत्री यशस्विनी’ इस मंत्र के जाप से देवी आराधना से मनोकामना और साधना फलीभूत होती है।

मान्‍यता और विधान : शास्त्रों के अनुसार जगदंबा देवी पर्वतराज हिमालय के घर में पुत्री के रूप में अवतरित हुईं और कालांतर में पार्वती के नाम से भगवान शंकर की अर्धांगिनी हुईं। नवरात्र के प्रथम दिन शैलपुत्री की आराधना होती है। नवरात्र में वैसे तो हर दिन कुमारी पूजन होता है, लेकिन पहले दिन दो वर्षीय कन्या के पूजन का विशेष विधान है/ आज का संदेश देवी शैलपुत्री का स्वरूप सदैव स्वस्थ रहने की प्रेरणा देता है।

वाराणसी में पूरे नौ दिनों तक अलग अलग मां के नौ स्‍वरूपों के पोस्‍टर यूपी पर्यटन विभाग की ओर से जारी करने के साथ ही मंदिरों से सुबह और शाम को सोशल मीडिया टीम की ओर से कोरोना काल में घर बैठे ही दर्शन पूजन का अवसर मिलेगा। नवरात्र के पहले दिन शैलपुत्री देवी पर मंदिर का पोस्‍टर यूपी पर्यटन की ओर से जारी किया गया। जिसे सोशल मीडिया पर लोगों ने खूब शेयर किया। रविवार को ब्रहमचारिणी देवी का पोस्‍टर और मंदिर से वीडियो जारी किया जाएगा जो गंगा तट पर स्थित है।

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