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कांवर यात्रा पर संशय बरकरार

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पुरी स्थित भगवान् जगन्नाथ की रथयात्र पर माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक के बाद अब सवाल यह उठने लगा है कि क्या श्रवण मॉस में होने वाली कांवर यात्रा पर भी सरकार या न्यायालय कोई रोक लगाएगी. श्रावण मॉस प्रारंभ होने में अब मात्र दो सप्ताह का समय शेष है और कोरोना संक्रमण के नियंत्रण होने जैसी स्थिति दिख नही रही है. इस वर्ष के श्रावण में कुल 5 सोमवार होंगे. प्रयागराज से वाराणसी मार्ग हो अथवा वाराणसी से जौनपुर या गाजीपुर मार्ग, प्रायः प्रत्येक मार्ग पर कांवरियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है. अगर शासन की तरफ से कोई निर्देश नही आया तो 3 जुलाई से ही सड़कें बम बोल के नारे से गुंजित होने लगेंगी. काशी सहित पूरे प्रदेश में सभी शिवालयों में कांवरियों की बड़ी संख्या को सामाजिक दूरी का पालन करवा पाना प्रशासन के लिए बहुत मुश्किल होगा.
फिलहाल मंदिरों में जल और प्रसाद चढाने पर रोक लगी हुयी है, अगर कोई नया निर्देश नही आता है तो कांवर लेकर मंदिरों में पहुंचे भक्तों को शिवलिंग पर जल अर्पित करने से रोकना आसान नही होगा. सावन मॉस में होने वाली कांवर यात्रा को लेकर तमाम तैयारियों पर फिलहाल लगाम लगी हुए है. डिजाइनर कपड़े से लेकर, कलश, मोबाइल कवर, बेल्ट आदि तक के एक बड़े बाजार की संभावना पर ग्रहण लगा हुआ है. दुकानदार पिछले साल के बचे स्टाक का भी भरोसा किये हुए हैं. दरअसल कांवर यात्रा की आर्थिकी भी बहुत महत्वपूर्ण है, यात्रा मार्ग गीत संगीत का माहौल हो या सहायता शिविर, डीजे हो अथवा सजा सजाया रथ सभी गतिविधियों से मिल कर एक बड़ा बाजार बनता है जिससे छोटे बड़े सभी व्यापारियों अथवा दुकानदारों का भी लाभ होता है. अगर कोरोना संकट के दृष्टिगत कांवर यात्रा पर रोक लगती है तो इस बाजार पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा .जब तक सरकार या न्यायालय का निर्देश नही आता तब तक तमाम मंदिरों के प्रबंधक, कांवरियां संघ और कावर यात्रा सम्बन्धी दुकानदार सभी संशय में हैं.

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